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महाराष्ट्र मुद्रांक शुल्क दर, थाड़ी देर बाद मेरी भी आँख लग गई। क्याकी खाला मुझे थपक रही थी। फिर आँख तब खुला जब बस ने एक जगह स्टाप किया रोड किनारे एक होटल पे ताकी लोग फ्रेश हो जाए। मैंने कहा- चला में ही कर देता हैं.. मैने ऋतु से कहा- कल झठ बोलने में डर नहीं लग रहा था, आज सच बोलने में डर रही हो? कहकर मैंने शोभा के सेल पर फोन किया।

मैंने उसको कहा- मैं जल्दी ही कुछ काँगा. और मैंने ऋतु को अपनी गोद में उठा लिया, सोफे पर ले जाकर लिटा दिया। मैंने उसको कहा- आज बैंड की जगह सोफे पर ही काम चलाना पड़ेगा... अंजू ने कहा सर मैं अपनी किश्मत को बदलना चाहती हैं पर कैसे? ये मेरी समझ नहीं आ रहा। पर मुझे कुछ बनना है। इसके लिए मैं कुछ भी कर सकती हैं। मुझे इस लाइफ से नफरत होने लगी है। मुझे इस तरह से घुट घुट कर जीना पसंद नहीं है...

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  1. मामी मुश्कुराई और कहा- लो बेटा, तुम चिपक जाया करो मुझसे फिच । क्या हुवा बेशक झप्पी लगा लिया करो बेटा। मैं तुम्हारी मामी हैं कोई गैर थोड़ी हूँ। तुम तो मेरे प्यारे से भान्जे हो.. कहकर मामी ने मुझे गले लगाया और सिर पे किस की।
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  3. रमेश : वैसे उर्मिला... बात तो सही है पायल की. मैं भही सोच रहा हूँ की कल से शाम में छत पर ही टहल लिया करूँ...(पायल को देख कर) क्यूँ पायल बेटी? ठीक रहेगा ना? लेकिन उसने मुझे हाथ नहीं लगा दिया। मैंने फिर हाथ उसकी जांच पे रख दिया और दबाने लगा। उसने मना नहीं किया। छत पे खाला लोगों में छोटा सा रूम बनाया हुवा था। जिसमें पुराना सामान पड़ा हुवा था।
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अब तो मेरा उठना और उसे बांहों में भर लेना लाज़मी बन गया था। मैं पलंग से उछला और जाकर पीछे से उसे बांहों में भर लिया। मेरा खड़ा लंड उसके नितंबों से जा लगा और एक हाथ से मैंने उसका एक उरोज और दूसरे हाथ से उसकी मुनिया को पकड़कर धीरे धीरे दबाना चालू कर दिया।

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दोस्तो, आप कुछ भी कहें या सोचें मैं अपने अंदर के रावण को तो मार सकता हूँ पर अपने अंदर के इमरान हाशमी को कभी मरने नहीं दूंगा।

गौरी आज नाश्ता करने के बाद नहाऊंगा। मैं आज तुम्हारी सैंडविच बनाने की जादूगरी देखना चाहता हूँ कि तुम किस प्रकार सैंडविच बनाती हो?दिव्या सेक्सी वीडियो

उसकी सीधी भाषा से मुझे लगा कि यह पटने वाली नहीं है. फिर भी मैंने कोशिश की… उसकी पीठ पर मैंने अपनी अन्गुली घुमाई. वो गुदगुदी के मारे चिहुंक उठी. मुझे अपने दुश्मन से मिलने की बड़ी बेकरारी हो रही थी मैं बस ख़तम करना चाहता था सब कुछ पर साला कुछ पता ही नहीं चल रहा था की ये हो क्या रहा है , तो मैंने मामी को एक बार फिर से टटोलने की सोची , मैंने फ़ोन मिलाया तीन चार घंटी के बाद उन्होंने फ़ोन उठाया

अभी हम दोनों पूरा गरम हो गये थे। शायद इस वीरान जगह का असर था, जो खाला भी आज पहले से ज्यादा हाट लग रही थी।

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