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बाप बेटी की बीपी

बाप बेटी की बीपी, मैं जाँघें भींच कर झड़ने लगी। दीपक मेरी चूत में लगातार झटके मारता रहा और जब दीपक के लण्ड ने मेरी चूत में पानी छोड़ा.. तो दीपक मुझे दबोचते हुए चूत में वीर्यपात करने लगा। मैं: जब उसे पता चलेगा ना कि लड़का आठवीं ही पढा हुआ है तो फिर आप चाहे इंजीनियर क्या पायलेट भी बताते रहना, वो यकीन ही नहीं करेगी।

उसके बाद कई लड़कियों से राजेश मिला, एक फॅशन डेज़ाइनर उसे अच्छी लगी पर साला ये मांगलिक वाली चीज़ बीच में आ गई. वो लड़की मांगलिक थी. राजेश ने एक पंडित से बात करी कुछ हल निकालने के लिए पर कोई फ़ायदा ना हुआ. मेरी समझ में नहीं आ रहा था कि उसे कैसे चुदाई के लिए तैयार करूं। मैंने पानी पीया और सोचने लगा। तभी मेरे दिमाग में एक आइडिया आया।

अपूर्वा: हां! और फिर मैं तुम्हें छोड़ने आ जाउंगी, फिर तुम मुझे छोड़ने चलना। ऐसे ही सुबह हो जायेगी और फिर साथ में ही ऑफिस के लिए निकल पडेंगे। बाप बेटी की बीपी फिर मैं वहाँ से अपने घर की ओर चल दिया और करीब 10 मिनट में घर पहुँचा.. दरवाज़ा बंद होने के कारण घंटी बजाई..

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  1. मैं: अरे यार, ये क्या मुसीबत है अब, आंख बंद करते ही सब कुछ घूमता हुआ लग रहा है और ऐसा लगता है कि कोई मेरा बेड उलट रहा है।
  2. मैं भी झड़ने के बाद कुछ देर बाद तक उसके कंधे पर सर रख कर उसके अपने होंठों से सटे गाल पर चुम्बन करते हुए उसके चूचों को प्यार से मसले जा रहा था और मेरे मुख से ‘उम्म्म्म चप्प-चप्प’ के साथ बस यही शब्द निकल रहे थे, ‘जानू आई लव यू.. आई लव यू सो मच..’ मोबाईल नंबर पोरीचे नंबर
  3. फिर मैंने अपने दोनों हाथों को उसकी पीठ पर ले जाकर उसकी ब्रा का हुक खोल दिया और उसकी पीठ सहलाते हुए सके चूतड़ों को रगड़ते हुए उन पर चाटें मारने लगा.. तो वो नशीले और कामुक अन्दाज में लौड़े को मुँह से बाहर निकाल कर बोली- जानी.. इरादे तो नेक हैं.. पर तेरा औजार उससे भी ज्यादा महान है.. मैं इसके बिना आज सुबह से तड़प रही थी.. दो दिनों में ही तूने मुझे इसकी लत सी लगा दी है.. मैं क्या करूँ..
  4. बाप बेटी की बीपी...मैंने उनकी बातों पर ज्यादा धयान नहीं दिया और रूम खोलकर अंदर आ गया। सोनल और पूनम बाहर ही खड़ी-खड़ी बतियां रही थी। जिससे माया आंटी का पारा चढ़ने लगा और वो ‘श्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह.. बस.. बस्स्स्स्स.. आआह.. रुको भी..यार एक तो पहले ही आग लगी हुई है.. तुम और हवा दे रहे हो.. कपड़े चेंज कर लेने दो.. नहीं तो अगर ख़राब हुए तो रूचि को बहुत जवाब देने पड़ेंगे..’
  5. तभी मेरी निगाह अन्दर गई और मैंने देखा कि नवीन की वाइफ झड़ रही थी और जय ने झटका मारते हुए नवीन की बीवी की चूत में ही पिचकारी छोड़ दी, वो अपना पूरे का पूरा लण्ड बुर में ठोक कर झड़ने लगा। मुझसे दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था। मैं रो रही थी, लेकिन वो कमीना नहीं रुका और धक्के पे धक्का लगाता ही गया।

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जेठ जी जैसे ही बाथरूम गए, मैं पेंटी खोजने लगी, मुझे ज्यादा शक जेठ पर ही था, पर पेंटी कहीं दिखाई नहीं दे रही थी।

तभी अभिजीत बोले- आह डॉली.. अब मेरा निकलेगा.. तेरी गरम बुर पाकर मेरा लण्ड झड़ जाएगा.. आआह्ह्ह.. आअह्ह्ह्ह.. आआह्ह्ह्ह..। फिर मैंने अच्छे से ऊँगलियाँ अन्दर-बाहर कीं.. जब दो ऊँगलियाँ आराम से आने-जाने लगीं.. तो मैंने माया से बोला- अब तुम्हारे सब्र के इम्तिहान की घड़ी आ चुकी है.. अपनी कुंवारी गाण्ड के उद्घाटन के लिए तैयार हो जाओ और मेरे लिए दर्द सहन करना।

बाप बेटी की बीपी,पर दरवाजा खुलते ही उन्होंने जो बोला, उससे मेरा डर एक पल में ही छू हो गया क्योंकि दरवाज़ा खुलते ही माया बोली- अरे राहुल, तुम अभी तक तैयार होकर गए नहीं? क्या इरादा ही नहीं जाने का?

जिससे मेरी रफ़्तार और तेज़ हो गई और मैं अपनी मंजिल के करीब पहुँच गया। अति-उत्तेजना मैंने अपने लौड़े को ऐसे ठेल दिया जैसे कोई दलदल में खूटा गाड़ दिया हो।

मैंने भी उसके दर्द भरे स्वर को भांपते हुए कहा- नहीं रूचि.. ऐसा नहीं है.. जब पहली बार तुमको देखा था.. मैं तो उसी दिन से ही तुम्हें चाहने लगा था.. मेरी सोच तो तुम पर ही ख़त्म हो गई थी और सोच लिया था.. कैसे भी करके तुम्हें अपना बना लूँगा।అబ్బాయిల సెక్స్

मेरा विश्वास पक्का हो गया कि जेठ जी की नीयत मेरे पर ठीक नहीं है क्योंकि जेठ जी अपनी बहू को नंगी हालत में देखकर अपने मन में मुझे चोदने का ख्याल रखकर लण्ड पकड़ कर मेरी बुर चोदने का सोच कर मुट्ठ मार रहे थे। पर मैं बार-बार जेठ जी को अपनी भावनाओं में नहीं लाना चाहती थी। कुछ मिनट बाद नवीन ने अपने कपड़े निकालने के लिए मेरे होंठ से अपने को अलग किए और कपड़े निकाल कर पूरी तरह निर्वस्त्र हो गए और इसी के साथ मेरी भी ब्रा-पैन्टी निकाल फेंके।

मैं कुछ देर चुप रही, फिर सोचने लगी कि जब इसको बुरा नहीं लग रहा… तो मुझे क्या…! फिर पैसे की ज़रूरत भी पूरी हो जाएगी और ट्रेन की बात याद आई, उस लड़के के साथ भी तो ग़लत कर रही थी।

तो माया ने किलकारी मार कर हँसना चालू कर दिया। मुझे तो मालूम था पर फिर भी मैंने पूछा- इतना हंस क्यों रही हो?,बाप बेटी की बीपी मैं उसकी सुंदरता के ख़यालों में इतना खो गया कि मुझे होश ही न रहा कि मैं एक बेटी के सामने उसकी ही माँ को कामवासना की नज़र से उसको चोदने की इच्छा जता रहा हूँ।

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