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भविष्य निर्वाह निधी मागे

भविष्य निर्वाह निधी मागे, सोनिया- पिछली बार मुझे मम्मी बनाया था… मैं क्या बुड्ढी लगती हूँ? तुम एक काम करो तुम पापा बन जाओ। इस से हमारे लिए भी कुछ नया हो जाएगा। तुम सब से आखिर में एंट्री मारना। राधा- हाय विजय बेटे तूने तो एक ही चुदाई में मुझे ढीली कर दिया। देख मेरी चूत से क्या बह रहा है? मैं इतनी कमजोर क्यों होती जा रही हूँ? मेरे पर ऐसे ही चढ़ा रह, मुझे अपने नीचे दबोचे रख। मैं तृप्त हो गई..

में कब से बेहोश था इसका तो मुझे अंदाज़ा नही था लेकिन खिड़की से आती सूरज की मध्यम किरणें बता रही थी या तो अभी शाम है या फिर सुबह.... नेहा--इस ज़हर का कोई इलाज नही है जब तक जय सेक्स करेगा वो ठीक रहेगा....अगर ज़्यादा देर तक उसने सेक्स नही किया तो उसके दिल की धड़कन इतनी बढ़ जाएगी कि हार्ट फैल भी हो सकता है....

वैसे तो शायद सोनिया उसका पूरा रस चूस जाती लेकिन शायद नेहा के अंडे चूसने की वजह से रस कुछ ज़्यादा ही निकल गया था या फिर उलटे लटके होने की वजह से सोनिया कण्ट्रोल नहीं कर पाई और थोड़ा वीर्य उसके मुँह से छलक कर नीचे बहने लगा जिसको नेहा ने जल्दी से चाट लिया। भविष्य निर्वाह निधी मागे लंड.....आआआआआ...मेरी चूत में अन्दर तक दाआआआअलो .................और जोर से.....और जोर से.....आआआआअह्ह्ह

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  1. में--आपने ठीक पहचाना.....में पहली बार ही किसी कोठे पर आया हूँ....और पहली बार में ही निराश होकर नही जाना चाहता.....
  2. में--मुझे एक शादी के लिए गिफ्ट लेना है...और ये मान लो गिफ्ट पापा की इज़्ज़त के हिसाब से होना चाहिए.... चेहरा गोरा करण्यासाठी उपाय
  3. मैं : आआहह एसस्स्स्स्स्स्स्सस्स दी रोज चोदुन्गा मैं तुम्हे मेरे इसी लंड से रोज तुम्हारी चूत चोदुन्गा मैं दरवाजा खुला था, और बेड पर उन्होने अपने लिए ब्लॅक कलर की ब्रा और पैंटी का सेट रखा हुआ था जो वो आज पहेन ने वाली थी, मैने उसे उठाकर अपने चेहरे से लगा लिया, उसमे से उनके जिस्म की खुश्बू आ रही थी..
  4. भविष्य निर्वाह निधी मागे...भाभी--अच्छा किया जय जो तुम मंदिर चले गये....मैं तो कब से मम्मी से मंदिर जाने के लिए कह रही थी....लेकिन मम्मी तो बस सब कुछ भूल कर शमा में ही खोई बैठी है कब से... मैं- देखा मुन्ना माँ के साथ मस्ती करने का मजा? देखो, माँ कितनी खुलकर मस्ती करवाती है। चलो हम तीनों साथ-साथ नहाते हैं। आइसक्रीम से बदन चिपचिपा हो गया है.
  5. शालू- ठीक है उसकी बीवी नहीं मान रही तो कोई बात नहीं मैं हाँ कह रही हूँ ना… आपको ना कोई एहसान लेने की ज़रूरत है ना को स्वार्थी महसूस करने की। बिंदास मस्ती करो अपने दोस्त के साथ। जब मैं चुदवाने लायक हो जाऊँगी तो मैं भी आप लोगों की मस्ती में शामिल हो जाऊँगी। फिर तो कोई बुरा नहीं लगेगा ना आपको? अगले दौर में विराज को भी शामिल होना था लेकिन अभी तो दोनों जीजा-साले के लंड झड़ के मुरझाए हुए थे। शालू ने दोनों के लंड एक साथ चूसने की कोशिश की लेकिन वो इतने छोटे थे कि अभी दोनों को इतना पास लाने का कोई मतलब नहीं था।

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अचानक मम्मी ने लम्बी चीख मारी और उनका सारा शरीर कुछ देर तक बिलकुल बर्फ की तरह जम गया और फिर पहले की तरह

शालू- सुनो जी, आप ही ज़रा चाट के गीली कर दो। तब तक मैं जय भाई साहब का खड़ा करती हूँ। भाई साब आप इधर आइये। धीरे, धीरे, धीरे, धीरे, मुंगेरी का मज़बूत लंड रूपाली की गांद में पूरा घुस गया और 30-40 सेकेंड तक मोतिया, रूपाली और मुंगेरी…तीनो की मानो साँसें रुक गयी. फिर धीरे से मुंगेरी ने 5-7 मिलीमेटेर बाहर को खींचा और लंड फिर अंदर घुसा दिया. फिर उसने ये लगातार करना शुरू कर दिया.

भविष्य निर्वाह निधी मागे,तभी अचानक वो हो जाता है जो ना रिया ने सोचा था और ना जय ने और ना ही शायद झाड़ियो के पिछे छुपि नेहा ने....

समीरने भी कहा- तुम जब भी चाहोगी.. मैं तुम्हें हमेशा तैयार मिलूँगा माँ.. बस मुझे ऐसे ही अपने पास रखना और मुझे बहुत प्यार करना..

खाना खतम करके हम तीनों मेरे रूम में आ गये। वहाँ भी हम तीनों बेड पर बैठकर गाँव की ही बातें करते रहे। अजय ने बताया की चाचाजी जल्द ही हमारे घर का भी कोई अच्छा ग्राहक खोज देंगे।चुदाई करते वीडियो

वहीं दूसरी तरफ काजल मुझे देख रही थी, उसकी नज़रों मे पछतावा था, वो शायद सॉरी फील कर रही थी, पर जय और पायल के सामने बोलने से घबरा रही थी, मैने भी अपनी अकड़ दिखाते हुए उसके चेहरे से नज़रे घुमा ली और जय भैया से दिन भर की बातों के बारे मे पूछने लगा.. फिर मुझे पता चला की मेरे घर के पास ही हमारे स्टोर की एक ब्रांच में गूड्स डेलिवरी में एक आदमी की जरूरत है। वह नौकरी मैंने अजय की लगवा दी। माँ और अजय को शहरी जिंदगी बहुत ही रास आई।

सुहानी अपने साथ आए दो आदमियो को बढ़िया जगह देख कर कॅंप लगाने की कह देती है और.....खुद उस टूटी हुई सीढ़ी का जायजा लेने लग जाती है.....

मैं तो अभी तक समझ नही पा रहा था कि ये कैसे हो गया, मैने कैसे इतनी बड़ी भूल कर दी, क्यो मैने पहले गोर से नही देखा कि वो काजल नही बल्कि पायल दीदी है… और आख़िर मे आकर मैने जो काजल का नाम ले लिया था उसके बाद तो पायल दीदी मेरी जो हालत करने वाली थी उसका मुझे अंदाज़ा भी नही था.,भविष्य निर्वाह निधी मागे उसको मरदों को ऐसे तङपाने में भी खास सुख मिलता था । दूसरे एक हिन्दू युवा पठ्ठा और और डिफ़रेंट टेस्ट की छुपी चाहत भी उसको सतीश के प्रति आकर्षित करती थी । और वह भी उसके साथ हमबिस्तर पर होने की अभिसारी कल्पना करती थी । पर अभी दोनों में से किसी की तरफ़ से कोई पहल नहीं हुयी थी ।

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