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जिओसिनेमा को चोदा

जिओसिनेमा को चोदा, नैना बोली- मेरे ख्याल से हम ऐसे ताश के पत्ते खेलते हैं जिसका पत्ता सब से बड़ा निकलेगा, उसको पहले चोदा जाएगा और इसी तरह हम यह तय कर लेते हैं कि किसकी बारी कब! क्यों यह ठीक नहीं क्या? इससे छोटे मालिक को भी वक्त मिल जाएगा आलखन के लिए?सबने कहा- हाँ हाँ यह ठीक रहेगा. मै समझ गया माँ मेरी परीक्षा ले रही है. और इसमें उनको आनंद भी मिल रही होगी. मैं भी उसी तरह उनको रिप्लाई दिया

और एक बात जो मैंने नोटिस किया वह ये कि दोनों बार सेक्स के समय चाची की भावनाएँ और क्रियाएँ पहले से कई अधिक बढ़ गई है. काम क्षुधा बढ़ गई .. शायद तीन गुना ! कॉलेज पहुंचे तो कुछ मनचले लड़के आवाज़ें कसने लगे- देखो क्या खूबसूरत जोड़ी है यार! ठाकुर को तो मज़ा ही आ गया!यह सुन कर रति थोड़ा शरमा जाती थी, ऐसा मैंने महसूस किया.

नैना ने मुझको दिलासा दी और मुझको लेकर दूसरे कमरे में चली गई. वो हंस रही थी लेकिन मैं सीरियस हो गया था. जिओसिनेमा को चोदा बिल्कुल.. तुम्हीं सोचो.. उसके बारे में तो सिर्फ़ तुम और तुम्हारे आदमी जानते थे... और शायद पुलिस महकमे में इंस्पेक्टर विनय के अलावा १-२ पुलिस वाले जानते होंगे. वो भेदिया जो कोई भी है.. इन्हीं लोगों में से कोई एक होगा...

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  1. नैना इतने दिनों से चुदी नहीं थी, वो भी बड़ी कामुक हो रही थी और मेरी थोड़ी देर की चुदाई से ही वो झड़ गई.हम दोनों ने कपड़े ठीक किये और तभी ही पूनम भी आ गई कमरे में और बड़ी उदास होकर बोली- अभी घर से फ़ोन आया है कि मेरी मम्मी बहुत बीमार है, मुझको तो अभी ही गाँव जाना होगा.यह कहते हुए वो रोने लगी.
  2. उनके मुख से निकलने वाली सिसकियों की तीव्रता अब कम पड़ने लगी थी . उनके जिस्म की ऐंठन कम होने लगी थी और उनकी कमर वापिस बेड पर लौट आई थी . पश्चिम बंगाल निवडणूक
  3. हिना बोली- उसकी आप चिंता छोड़ दीजिये, वो मैं संभाल लूंगी. अगले हफ्ते हम फिर यहाँ ही मिलते हैं आगे का कार्यक्रम तय करने के लिए! उस रात मैं बहुत बहुत देर तक सोचता रहा, और एक योजना बनाने लगा कि किस तरह मैं हमारी रात्रि के चुंबनो में कुछ बदलाव कर उनमे कुछ एहसास डाल सकूँ.
  4. जिओसिनेमा को चोदा...तब तक मैंने शांति को घेर लिया और उसकी एकदम कसी चूत जो गीली हो रही थी, मैंने ऊँगली से भग को मसलना शुरू कर दिया, उसके छोटे लेकिन रसीले होटों को भी चूमने लगा. मैंने आखिरी बार थोड़े से धक्के और मारे और अपना मैरी की चूत से लंड निकाल लिया.मैरी आँखें बंद किये लेटी हुई थी और निम्मी होटल के तौलिये से मैरी की चूत और मेरे लंड को साफ़ कर रही थी. मैरी की सांसें अभी भी धौंकनी की तरह चल रही थी.
  5. मम्मी ने छाया को कहा- छाया, तुम निर्मला को सतीश का काम समझा देना. वैसे ही यह तो जल्दी शहर जाने वाला है, उसके बाद मैं देखूंगी इसको कहाँ रखें. तभी हम तीनों को एक साथ होश आया और चंचल भाभी चिल्लाई- रश्मि तुम यहाँ क्या कर रही हो?रश्मि भाभी की नज़र अभी भी मेरे लौड़े पर टिकी थी और वो उसको अपलक ताक रही थी.

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पिक्चर खत्म हुई तो मैडम बोली- सतीश तुम वापस मेरी कार से चलना, मैं तुमको रास्ते में ड्राप कर दूंगी.मैंने भी हामी भर दी.मैडम के साथ जाने से पहले मैंने नैना और पारो और रति को एक कार में बिठा दिया जो उनको घर तक छोड़ आने वाली थी क्यूंकि वो लड़की भी उसी तरफ की रहने वाली थी.

दोनों अभी भी चुप बैठी थी और उनके मुँह झुके हुए थे, मुझको और नैना को बड़ा मज़ा आ रहा था. मैंने नैना से कहा कि वो स्टोर से मोटा और बड़ा रेंच और पेंचकस ले आये शायद उनकी ज़रूरत पड़ सकती है सर्विस करते हुए! मैं माँ के निप्पल को चूमने लगता हु . कुछ देर चूमने के बाद मैने अपना चेहरा हटाकर निप्पल को घूरता रहा और फिर से अपना चेहरा स्तन पर झुका दिया. इस बार मेरी जिव्हा बाहर आती है और माँ के निप्पल को चाटती है .

जिओसिनेमा को चोदा,नजाने मुझे भी अब सब कुछ अच्छा लग रहा है प्राइवेट पार्ट को चाटना चुसना सूंघना मेरी जिस तरह से परवरिश की गई थी जिस माहौल में मैं पढ़ा लिखा था बडा हुआ था उस परिवेश में मैं इस तरह के सेक्स के बारे में सोच ही नही पाता

लंड के घुसते ही चूत में बहुत गीलापन आना शुरू हो गया और फिर मैंने कभी तेज़ और कभी आहिस्ता धक्के मार कर ऊषा का पानी जल्दी ही छूटा दिया और वो कई क्षण मुझ से लिपटी रही.फिर हम तीनों बड़ी गहरी नींद में सो गए.

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रति की बातें सुन कर नैना और मैं हंसी के मारे लोटपोट हो रहे थे.मैं भी रति की सिल्की बालों से भरी चूत के बालों से खेलता रहा. मैंने उर्मि के मम्मों के बाद अपना ध्यान उसके सपाट पेट और नाभि पर लग दिया और थोड़ा सा चाटने के बाद मैंने चूत पर छाए काले

सुबह जब मेरी नींद खुली तो सूरज काफी सर पर आ गया था, कालेज के छात्र ब्रेकफास्ट करने होटल के रेस्टोरेंट में गए हुए थे.

मैंने भी अपनी चुदाई की स्पीड तेज़ कर दी और अपने दोनों हाथ को प्रेमा के चूतड़ों के नीचे रख दिया और उसको अपने से पूरी तरह से जोड़ कर तेज़ धक्के मारने लगा और चंद मिन्टों में प्रेमा एक बार फिर छूटी और साथ ही मैं भी छूट गया.,जिओसिनेमा को चोदा फिर हल्के हल्के मैंने हाथ उसकी सलवार में छुपी उसकी चूत पर रख दिया. उसने अपना हाथ मेरे हाथ के ऊपर रख दिया और उस पर ज़ोर डालने लगी. मेरा हाथ उसकी कमीज से ढकी सलवार के ऊपर था.

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