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चूत लंड चूत लंड, शाम देर तक मे अपने ऑफीस में बैठा यही सोचता रहा.., प्राची को मेने यथा संभव जानकारी जुटाने में लगा दिया था, लेकिन वो अब तक कोई सुराग नही दे पाई थी……! 'पापा इतना अच्छा कलेक्शन है यहाँ पर.' मनिका ने जयसिंह से आँखें मटका कर कहा. उसका आशय साफ़ था कि क्या वह शॉपिंग कर सकती है?

कुछ देर वो उसे लिटाकर कमरे में इधर से उधर टहलने लगी.., मन नही माना, तो फिरसे कोशिश शुरू करदी, वो जल्द से जल्द उसे इस नरक से दूर ले जाना चाहती थी..! सुजाता : हंसते हुए, पगले मेरी पैंटी मैं कैसे उतारुँगी, मा ने यह बात अपनी दोनो जाँघो को खोल कर कही और फिर मेरी आँखो मे देखने लगी,

मे – अरे नही भाभी.., आप समझा करो.., पलंग इतना बड़ा नही है कि हम दोनो सो सकें.., आप खम्खा परेशान मत हो…! चूत लंड चूत लंड अब संजू को भी उसी कोठे में अड्जस्ट करना था.., तख़्ती दो के ही लायक थी.., तीसरे की तो किसी भी सूरत में गुंजाइश हो ही नही सकती.., चलो तीनों लड़कियाँ हो तो अड्जस्ट कर भी लें…!

भाभी के साथ चुदाई

  1. यूँ अचानक खींचे जाने से वंदना थोड़ी सी हैरान तो जरूर हुई लेकिन मेरी बाहों के मजबूत पकड़ में वो अपने सम्पूर्ण समर्पण के साथ किसी लता के समान मुझसे लिपट गई और हम दोनों के बीच सिर्फ खामोशियाँ ही रह गईं।
  2. आप उसकी गाड़ी के आस-पास ही रहना, और जैसे ही मे इशारा करूँ, आप उसकी डिकी में छुप जाना, ये तो आप कर सकती हैं ना,. महाराष्ट्र शासन नोकरी 2016
  3. 'हाहाहा...अरे हो जाएगा, तुम इतनी इंटेलीजेंट हो, डोंट वरी.' जयसिंह मनिका की तारीफ करते हुए बोले, 'चलो अब बताओ की डिनर रूम में मंगवाएं या नीचे रेस्टोरेंट में करना है?' उसकी 38 की भारी भरकम गान्ड मारने में मुझे बहुत मज़ा आया, शुरू में तो उसे थोड़ा तकलीफ़ हुई, लेकिन कुछ देर के बाद तो, पुछो मत….
  4. चूत लंड चूत लंड...संजू ने उनसे कुछ दूरी पर अपनी बाइक रोकी, उसे साइड स्टॅंड पर टीकाया और वहीं से उसने उन लोगों को चेतावनी देते हुए कहा…! लेकिन दुपट्टा खींचना इतना आसान नहीं था… मैं वंदना के ऊपर यूँ औंधा पड़ा हुआ था कि मेरे सीने और उसके उन्नत उभारों के बीच दुपट्टा बुरी तरह से फंस गया था और जब मैंने उसे खींचा तो सहसा ही वन्दना का ध्यान उस तरफ चला गया और उसने मेरे होठों को चूसना छोड़ दिया और अचानक से हमारी निगाहें एक दूसरे से टकरा गईं…
  5. निशा की हरकतों ने मेरा बुरा हाल कर दिया था, मेरा लंड बुरी तरह से ऐंठने लगा…मुझे लगा जैसे ये फट जाएगा… अपने एक साथी को गिरते देख अब्बास अपनी जगह से उठना ही चाहता था कि उसे युसुफ ने दबोच लिया.., वो दोनो सोफे पर ही गुत्थम-गुत्था हो गये…!

घरात लक्ष्मी येण्यासाठी काय करावे

पार्टी शाम 8 बजे से शुरू होनी थी, सब लोगों को घर छोड़कर में 4 बजे से होटेल पहुँच गया, सारे इंतेज़मत का जायज़ा लिया.

मे उसकी बात सुनकर मुस्करा उठा, और बोला – अब तुम्हारा ये मामला मेरे हाथ में आ गया है, देखती जाओ मे क्या करता हूँ…! भाभी का ऐसा दुर्गा रूप देख कर प्राची बोली – तो फिर चलिए मेरे साथ, अब लगता है, मेरा फिरसे हथियार उठाने का वक़्त आ गया है…!

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मनिका ने एक दो फोटो ही डिलीट किए थे कि जयसिंह के फ़ोन पर एक बार फिर से रिंग आने लगी, ऑफिस से माथुर का फ़ोन था.

पन्चर क्या, उसके चारों व्हील एक साथ बैठ गये.., बड़ी मुश्किल से ड्राइवर ने गाड़ी को कंट्रोल किया.., फिर भी वो रोड से नीचे तक घिसती चली गयी…!होळीच्या हार्दिक शुभेच्छा

उनकी चूचियाँ अपनी पूरी गोलियों को कायदे से सँभालते हुए गाउन में यूँ लटकी हुई थीं मानो दो खरबूजे… उन लकीरों ने मुझे यह सोचने पे मजबूर कर दिया कि गाउन के अन्दर उन्होंने ब्रा पहनी भी है या नहीं। सही मौका ताड़ मेने अपने मूसल को हाथ में लिया, उसे मेघना को दिखाकर दो-तीन बार मसला, उसे दरवाजे की तरफ करके मुठियाने लगा…

कुछ देर बाद मुझे लगा कि मेघना वहाँ से जा चुकी है, तो मेने निशा को अपने से अलग किया… वो अपनी मुस्कुराती आँखों से मुझे देखने लगी..

मैंने एक बात नोटिस की कि रेणुका जी का नाम सुनते ही मेरी नज़र वन्दना की जवानी को भूल गई और उसकी मदमस्त चूचियों को इतने पास होते हुए भी बिना उनकी तरफ ध्यान दिए हुए रेणुका जी से मिलने की चाहत लिए उसके घर की तरफ चल पड़ा।,चूत लंड चूत लंड वंदना के हाव-भाव से ऐसा कुछ लग तो नहीं रहा था लेकिन क्या करें… मन में चोर हो तो हर चीज़ मन में शक पैदा करती है।

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