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घरापुढे कोणती झाडे लावू नये

घरापुढे कोणती झाडे लावू नये, रिया बोली लगता है तुम्हारी ये दोस्त, तुम्हारी किसी बात को लेकर बहुत परेशान है. पहले तुम इस से बात कर लो, फिर हम अपनी बात करते है. अपने इसी डर के साथ मैं 7 बजे शिखा के घर आ गया. लेकिन शिखा के घर आकर उस के साथ रहने से मेरे दिल को कुछ सुकून मिला. खाना पीना खाने के बाद, 10:30 बजे मैं उपर छत पर आ गया.

अभी रिया मेरी इस बात का कोई जबाब दे पाती कि, तभी प्रिया का दूसरा एसएमएस आ गया. रिया मुस्कुराते हुए, मुझे देखने लगी और मैं प्रिया का मेसेज पढ़ने लगा. इस ख़याल के मेरे मन मे आते ही, एक बार फिर मुझे, कीर्ति की यादों ने घेर लिया. वो कैसी है, क्या कर रही है. वो मुझे याद कर रही है या नही, ये सारी बात मेरे दिमाग़ मे घूमने लगी. लेकिन मेरे पास इन मे से किसी भी बात का कोई जबाब नही था. मुझे कीर्ति की किसी भी बात की, कोई खबर नही थी.

कीर्ति बोली क्यो मैने तुम्हे जब शाम को फोन लगाया था. तब तुमने मौसी से कितनी देर तक बात की थी. क्या मैने तुम्हारी इस बात का कोई बुरा माना था. जो तुम्हे मेरे जीतेन से बात करने का इतना बुरा लग रहा है. घरापुढे कोणती झाडे लावू नये ये सिर्फ़ एक गाना नही, मेरे दिल के वो अहसास थे. जो इस समय मैं प्रिया को लेकर महसूस कर रहा था. वक्त जैसे हम लोगों के लिए रुक सा गया था. सब के लब खामोश थे, लेकिन आँखे आँसू बहा कर अपने ज़ज्बात जाहिर कर रही थी.

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  1. मेरे आगे कदम बढ़ते ही प्रिया की आखों से आँसू छलकने लगे और उसने अपने दोनो हाथ दरवाजे से अलग कर लिए. मुझे लगा कि शायद मेरे गुस्से से डर कर, प्रिया मुझे जाने के लिए रास्ता दे रही है.
  2. रास्ते मे वो आदमी अज्जि को अपनी बात बताने लगा. जिसे सुनकर, अज्जि की आँखों से आँसू छलक गये और उसका चेहरा गुस्से से लाल हो गया. कभी उसकी आँखों मे अपने माँ बाप का चेहरा घूम रहा था तो, कभी उसके दिमाग़ मे उस आदमी की कही बातें घूम रही थी. தமிழ் செக்ஸ் தமிழ் செக்ஸ் தமிழ் செக்ஸ் தமிழ்
  3. ये बात समझ मे आते ही, मैने बिना कुछ सोचे समझे उस लड़की के कंधे पर हाथ रख दिया. वो लड़की सच मे ही बरखा थी और अचानक मुझे अपने सामने देख कर, कुछ घबरा सी गयी थी. सीरू दीदी की ये बात सुनते ही, मैं उनकी तरफ देखने लगा. मुझे समझ मे नही आ रहा था कि, अब इनके दिमाग़ मे क्या चल रहा है. वही शिखा दीदी ने हैरानी से सीरू दीदी से कहा.
  4. घरापुढे कोणती झाडे लावू नये...हेतल दीदी बोली तुम फिकर मत करो, मेरी सर्जरी मे तुम ज़रूर मेरे पास रहोगे. यदि भैया ने मेरी सर्जरी के समय तुमको नही बुलाया तो, तुम देखना मैं फिर से सर्जरी करवाने से भाग जाउन्गी. सीरू दीदी की ये बात सुनते ही खालिद ने उन्हे खिसियाते हुए देखा और वो पिछे हटने को हुआ. मगर तब तक अमन ने आकर उसे पकड़ लिया और अजय ने उसके पेट मे एक जोरदार मुक्कों की बरसात कर दी. मुक्के की मार खाते ही, खालिद ने अपनी सफाई देते हुए कहा.
  5. मैने उसे मनाने के लिए वापस कॉल किया. मेरे कॉल के जबाब मे कीर्ति ने मेरा कॉल काट कर मुझे वापस कॉल लगाया और मेरे कॉल उठाते ही, उसने मुझसे कहा. मैं अपने बाप की हरकत के लिए, बेहद शर्मिंदा था और तुमसे नज़र मिला सकने की ताक़त भी, मेरे अंदर नही थी. ऐसे मे यदि मैं उस घर मे रुकता तो, मुझे रोज तुम्हारा सामना करना पड़ता और मैं रोज अपने आपको तुम्हारे सामने शर्मसार महसूस करता. इसलिए मैने तुम्हारा घर छोड़ने का फ़ैसला लिया था.

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मैं बोला ये रज्जो कौन है. मैने तो तुम्हारे यहाँ किसी काम वाली को नही देखा. हाँ काम करने एक बूढ़ी सी औरत ज़रूर आती है. कहीं तुम उसकी ही बात तो नही कर रहे हो.

निक्की बोली क्या शायरी भेजना ज़रूरी थी. यदि शायरी नही आती तो, सीधे एक सॉरी का एस.एम.एस कर देते. वो उसी मे खुश हो जाती. मैं बोला क्योकि, मेरे दिल से उनके लिए पहली बार मे दीदी ही निकला था और फिर उन्हो ने भी मुझे अपना भाई मान लिया. उनकी शादी तो इसके बाद पक्की हुई. इसलिए अब मैं उनको दीदी ही बोलता हूँ.

घरापुढे कोणती झाडे लावू नये,सलीम बोला मैने सिर्फ़ निक्की बाजी को देखा था. लेकिन खुदा कसम मुझे नही पता था कि, वो मेरी बाजी है, वरना मैं ऐसी हरकत कभी नही करता.

अजय बोला तू क्यो इतना उदास होती है. तूने कुछ ग़लत नही किया. तुझे अपने भाई की खुशी के लिए जो ठीक लगा, तूने वो किया. मगर मुझे लगता है कि, अमन सही कह रहा है. हमे उसको भूलना होगा. ये ही हमारी और उसकी भलाई के लिए ठीक होगा.

ये बात सोचते सोचते अचानक मुझे निक्की की, एक बात याद आ गयी. जो निक्की ने प्रिया की बीमारी के, मुझे पता चलने पर कही थी कि, प्रिया सब कुछ अपने दिल के अंदर छुपा कर रखती है. वो अपना दर्द किसी को दिखाना पसंद नही करती. उसे शायद किसी का दिल दुखाना या किसी को उदास देखना अच्छा ही नही लगता.चोदा चोदी करने वाला

अजय बोला हां, बहुत खुश हू. अब थोड़ी सी मेहरबानी और कर देना कि, ये बात किसी को मत बताना. वरना अमन मेरी जान खा जाएगा. तभी प्रिया प्रसाद और फूल माला लेकर आ गयी. उसने प्रसाद और फूल माला मुझे पकड़ाते हुए, दर्शन करने चलने के लिए कहा तो, मैने उसे रोकते हुए कहा.

लेकिन उसने ये बात अज्जि से कभी पूछी नही. शिखा बार बार उस से अपनी टॅक्सी चलाने के बारे मे पूछती रहती थी और एक दिन अज्जि ने इसके लिए हां कर दिया. लेकिन अज्जि ने कहा कि, वो टॅक्सी आरू के हॉस्पिटल से छुट्टी होने के बाद ही चलाएगा और टॅक्सी को अपने पास ही रखेगा. जिसके लिए शिखा तैयार हो गयी.

अजय की आवाज़ सुनते ही हम लोगो ने अजय की तरफ देखा तो, वो हमारे पीछे खड़ा था. उसकी बात सुनते ही मैने कहा.,घरापुढे कोणती झाडे लावू नये मगर अंदर ही अंदर तुमको खो देने के दर्द से मेरा दिल रोता रहता. मेरा दिल करता कि, मैं एक बार तुम्हे अपने गले से लगा कर खूब रो लूँ. अपने दिल का सारा हाल तुम्हे सुना दूं. लेकिन ऐसा करने की मेरी हिम्मत ही नही होती थी. मैं बस अंदर ही अंदर रात दिन घुटती रहती थी.

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